Sunday, August 7, 2016

नागपंचमी!

इस नागपंचमी ..
सपेरों ने दर्शन नहीं कराये .....
उन देवताओं के -
जिन्हें हम -
नाग देवता कहते हैं !

पता नहीं ..
किसी डर से अथवा ...
अब अस्तित्व में नहीं रहे -नाग ....
और इस काल में ...
अब कोई नहीं देता -
नाग देवता के दर्शन पर ..
दक्षिणा !

फिर अब ...
नागों को पकड़ने और ..
बीन बजा कर ....
नागिन डांस के भी ...
दिन लद गए !

अब कहाँ वह ....
दादी अम्मा ...
जो देती थीं "सीधे" में गेहूं और गुड़ ....
और नातियों को ...
नाग देवताओं के दर्शन करवातीं थीं !

न वे बूढी ,जर्जर, ममतामयी दादियां ..
रहीं और ....
न वे नाती ...
जो इंतिज़ार करते थे -
ख़ौफ़ज़दा हो कर कि -
नागपंचमी आ रही है और शेषनाग भगवान् के वंशजों के दर्शन करेंगे !

आधुनिक मानवीय नागों ने ..
ले ली है -
जगह ...
उन पुरातन नागों की ....
और अब ये -
आधुनिक नाग ....
सिर्फ विषैले ही नहीं होते ...
वरन खूंखार और चालाक भी होते हैं !

आईये तय करें नागों का  पैमाना जहां ...
देश काल और मज़हबी रंगों ने  बदल दी है -एक नस्ल की पहचान !
बचाएं नागपंचमी के-
अंतर्निहित भाव को !
सपेरों की प्रजाति को !
बीन की तान को !
और
भारतीयता के रचे बसे प्राण को !

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