Tuesday, October 11, 2016

जन्मदिन पर बेटे को चिट्ठी !

ओ मेरे अक्स !
मेरे शिखर !
मेरे हिमाद्रि !
तुम धीरे धीरे ...
बड़े हो रहे हो !
सयाने घने और
गहरे हो रहे हो !

प्रतिबिम्बित ...
शक्ति सामर्थ्य और
सफलता के लिए ...
कृतसंकल्पित अधीर और
दृढ़प्रतिज्ञ हो रहे हो !

जन्मदिन पर आज -
देना चाहता हूँ तुम्हें -
धूप ,उष्णता और उमस ..
तूफ़ान ,तपन और लगन ..
जिससे -
कल तुम्हें मिल सके ...
छाँव ,नमी और नमन !

बेटे !!
यही है जीवन का चलन !
थकन ,मिटन और फिर नमन !

"जो थका है ...
जिसने सर्वस्व ...
अर्पित किया है ;
वही कल नमित योग्य ..
होता है !"

बहुत सी शाखाएं -
तुम्हें बांधना चाहेंगी ...
कुछ लक्ष्य की और तो ..
कुछ कल्पनाओं की और ..
लपेटना चाहेंगी ..
पर साबित करना है तुम्हें ;
अपना चलन !
अपना पथ और अपना जनम !!

"सब्यसांची" @ अर्जुन !!
सरीखे बन ...
साबित करो तुम ...
तुम्हें पुकारने और ...
नामित करने का ..
मेरा चयन !

बेटे !!
तुम बड़े हो रहे हो !
चयन करो अपने स्वप्न ..
और कर्मठता से ..
भर दो उसमें ..
दिलेरी ,जीवटता
और तपन !

सब्यसांची @ का ..
मतलब ही होता है -
"पांच युद्ध कलाओं में -
पारंगत योद्धा द्वारा ...
लक्ष्य का दमन !!!!!!"

शुभ जन्मउत्सव के
आशीर्वाद सहित -

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