Sunday, October 9, 2016

अपना अपना दर्द ;अपने अपने हिस्से !

वक़्त लेता है ..
करवटें न जाने कैसे कैसे ..
उम्र इतनी तो नहीं थी जितने  सबक़
सीख लिए हमने ..!!

"जो जितना ...
जिसके हिस्से में है
वो उसको मिलता है !

जिसके साथ ...
जितना चलना लिखा हो ..
उतना ..
चलना ही पड़ता है !

कोई मायूस है ...
किसी का साथ ..
न मिलने पे और ...
कोई खुश है ..
किसी का साथ छूटने पे !

माना कि -
उम्र उतनी नहीं थी ..
लेकिन ,
उस उम्र में ..
दिल तो ..
लगा ही बैठे न  जनाब  ....?

अब जब सबकुछ ...
लगा ही दिया था ;दांव पे ..
तो बेफिक्री से ...
धुंआ धुंआ कर दो ...
उस ज़िन्दगी को ;
जिसने "खुशदिल इंसा " को ..
मयस्सर कर दीं ..
ये रुसवाईयाँ !

माना की -
उमर उतनी नहीं थी ..
हुजूरेआला की ..
लेकिन सबक भी तो ..
जल्दी जल्दी ..
पन्ने पलटा कर ..
पढ़े आपने ???"

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