Tuesday, October 11, 2016

हम जल गए और रावण जिन्दा रह गए !

बहुत कोशिश की ...
बहुत बारूद डाली ..
लेकिन
जला न सका मैं ;
कल रात ..
देश के रावणों को !

अरे!
एक आध रावण होता ..
तो यूँ ही मार कर ;
फांसी पर चढ़ जाता ..
लेकिन
यहाँ तो -चारों और
रावण तो रावण ..
अरे उसके भी पितामह 
खड़े हुए हैं !

रावण के तो दस सर थे ..
इन आधुनिक रावणों के तो ..
सैकड़ों सर हैं !

बहुत ही शक्तिशाली हैं ..
ये रावण के वंशज !

न जाने कौन सा 
वरदान है ..
इन अताताइयों को जो ..
इनकी मोटी खाल में -
कुछ भी ..
असर ही नहीं करता ?

बेशर्मी ,निर्लजता और गद्दारी से
सराबोर ये रावण ..
शायद उस त्रेतायुगीन ..
रावण के ही ..
वंशज होंगे ;
तभी तो ..
हनुमान जी द्वारा ..
लगाई आग का बदला ..
लेने ये वंशज ..
लंका से आकर ..
सारे भारतवर्ष को ..
जला रहे हैं !

सच !
कभी कभी लगता है जैसे -
जलाना ..
हमें रावण को था;
और आज -
रावण हमें जला रहे हैं !!

इन रावणों ने बदल दिए हैं - बाणों के नाम !

कभी काश्मीर तो कभी आरक्षण और धर्मनिरपेक्षता जैसे ....
सर्वव्यापी बाणों से ..
भारत वर्ष का ..
संहार करते हैं !

न ये डरते हैं और ..
न ये मरते हैं !

यदि भारतवर्ष को ..
बचाना है तो -
सिर्फ एक ही रास्ता है ;
इन बुढाते ,लँगड़ाते और
खांसते - खंखारते ..
रावणों को -
चुनाव में इनकी औकात दिखलाओ और ..
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से-
आग्रह करो कि -
हे प्रभु !
ऐसी कोई "इंटरनल स्ट्राइक"  चलाओ की ..
ये सारे रावण ...
देश हित में ..
थोड़ा जल्दी ..
नरकारोहण की और
पलायन कर जाएँ !

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