Saturday, October 1, 2016

जलन तुम्हारे हीरो बनने की !


पाकिस्तान पर हमले में-
तुम्हारी ऐसी वाही वाही हुई ...
जैसे तुमने दिल्ली से ..
सीधे छलांग लगा कर ..
पीओके में -
खुद बमबारी कर दी हो ?

और फिर ..
हो भी क्यों न ?
आखिर -
"निर्णय नीति और निर्भयता" तो
तुम्हारी ही थी न ?

न तुम सोचते ...
न तुम बोलते और ..
न तुम खौलते ..
तो फिर तुम्हें तुम्हारे विरोधी
कैसे तौलते ??

बहुत ढूंढा ...
बहुत खोजा ...
बहुत मगज़मारी भी की ... लेकिन ..
एक नुक्स न मिला ...
तुम्हें नीचा दिखाने का !

न परिवार न आसक्ति ..
न धन न शक्ति ...
सिर्फ राष्ट्रभक्ति !

अरे ऐसी कैसी राष्ट्र भक्ति ??

बहुत कॊशिश की ...
कि कहीं से तुम ...
कमज़ोर दिख जाओ ...
लेकिन एक बार भी ..
एक अंश भी ...
एक अक्षर भी ...
और एक नुक्स भी
वे ढून्ढ न पाए !

तुम हीरो बन गए और ..
वे जीरो !
बड़ी गहरी माथापच्ची के बाद  ...
उन्हें कहना पड़ा कि -
"हम आपके साथ हैं !"

बस क्या कहूँ -
"न जाने कौन सज़दा करता है ;
तुम्हारे वास्ते ....
तुम कभी कभी डूबते भी हो .. तो
कमबख्त ..
समुन्दर उछाल देता है !"

No comments:

Post a Comment