Sunday, October 23, 2016

मेरी कहानी ... बस इतनी सी !

मेरी कहानी ...
बस इतनी सी !

लोग मिलते गए और ..
मैं प्यार करता गया !

लोग बिछड़ते गए ...
मैं उलझता गया !

मैं छोड़ नहीं पाया उन्हें ...
जो छोड़ गए मुझे !

मैं भूल नहीं पाया उन्हें ...
जो भूल गए मुझे !

मकड़ी के जालों के चंगुल जैसा ...
फँसता गया मैं ...
हाँथ पैरों की भांति -
दिल ओ दिमाग भी
जकड़ता गया
उन अनाम .....
बिछड़े रिश्तों के बाहुपाश में
और एक दिन ...
इन बेगैरत अफसानों ने ..
चूस कर मेरा वज़ूद ...
झोंक दिया मुझे ..
समय की भट्टी में ...
हमेशा हमेशा के लिए;
नेस्तनाबूत होने को !

लेकिन इतना भीषण ...
तेज़ाब फेंकने के बाद भी ..
मैं लौट कर आ गया ...
अपनी स्वप्निल दुनिया में ..
जहाँ ...
अब मैं बहुत खुश हूँ ...
अपने इकलौते ...
दिल के सहारे ...
जिसका ह्रदय प्रत्यारोपण ..
कर दिया है ...
मेरी उलझनों के बाद आई ..
सुलझन ने !

देख लो-
ऐ दिल के बेईमान सौदागरों !!
मैं जिन्दा हूँ !
अपने होशोहवास में !
तुम्हारे श्रापों के बावज़ूद !

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