Saturday, October 22, 2016

एक बून्द के पीछे भागता रहता है इंसान!

एक बून्द के पीछे भागता रहता है इंसान ...

यदि "ठोस" की अपनी  उपयोगिता होती तो; "तरलता" के क्यों इतने मायने होते ??

एक बून्द प्यार में -समर्पण ..
एक बून्द -आंसू से -दुःख तो एक बून्द -आंसू में समाया सुख भी !
एक बून्द -मदिरा के रसपान से कलह तो ...
एक बून्द दुग्धपान से -
माँ शब्द की उत्पत्ति !

एक बून्द अमृत पान से .. अमरता तो ...
एक बून्द विषपान से मृत्यु !

एक बून्द अमृत के इन्तिज़ार में ....
शरद पूर्णिमा की खीर ..
तो एक बून्द अमृत के इन्तिज़ार में ....
देवताओं द्वारा
समुद्र मंथन !

एक बून्द स्खलन से .. जीवोत्पत्ति तो
एक बून्द जबरदस्ती से व्याभिचार !

एक बून्द तर्पण में -जीवन  चक्र से मुक्ति ?
तो एक बून्द अर्पण से ...
भागीरथी का आगमन !

एक बून्द नफरत से दंगे तो
एक बून्द मोहब्बत से ..
सभी खुशियों संग रँगे !

एक बून्द  -
लहू निछावर करने से -शहीद तो
एक बून्द पसीने से -कर्मठता !

एक बून्द सिन्दूर से सुहागिन और
एक बून्द बिन सिन्दूर के ....
एक सधवा की ...
विपरीत यात्रा का अनुगमन !

देखना बूंदों पर टिका संसार ....
बूंदों में समा जाएगा !
देखना प्रलय भी बूंदों से होगा....

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