Thursday, October 13, 2016

ऐ ज़िन्दगी मेरा हिसाब कर दे !

सांझ होने को आई लेकिन
धूप ढलती नहीं ...
फ़िज़ाएं बदलती नहीं और
बादल बरसते नहीं !

सुबह ने बोला कि -
मेहनत कर ..
सांझ में सुकून मिलेगा !

दोपहर ने बोला कि -
मत घबरा ;
सांझ में सुकून मिलेगा ...
और सांझ में -
जब मैं पहुंचा कि -
ऐ ज़िन्दगी ;
मेरा हिसाब कर दे ...
अब सांझ की बेला ...
आ गई है ..
तो सांझ ने बड़ी -
तसल्ली से कहा की ...
घबराओ मत और
मेहनत करो ...
देखना कल की सुबह ..
बहुत सुनहरी और
सुखद होगी !

और ऐसे ही ...
सांझ के सुकून और
सुबह की सुनहरी ..
आशा की चाह में ...
दौड़ गया ...
एक पूरी ज़िन्दगी की ..
मैराथन दौड़ !

और आज जब ..
खोजता हूँ -
इतनी लम्बी दौड़ के बाद ..
सुकून के कुछ पल तो ..
बस ;
बुढ़ाता शरीर और
उखड़ी हुई साँसों के सिवा ..
ज्यादा कुछ नहीं दिखता !

वो तो शुक्र मनाओ ..
मेरे जीवट का ;
जो इस दहलीज पर ..
मुझे खुद के नागा सम्प्रदाय के होने का .. अहसास हुआ और
आत्मा ने समझाया कि ...
क्यों घबराता है ..
न सिकन्दर की ..
न अकबर की ....
औकात थी कि -
मौत के समय ..
कुछ ले दे कर ..
ज़िन्दगी को ..
"दाखिल दफ्तर" करें !

किसी को चीटियों ने खाया ..
तो कोई गंगा की खाद बना !
वाकई
बादशाहों को भी ..
नँगे बदन और खाली हाँथ ..
जाना पड़ा !

ये तो -
ज़िन्दगी का निचोड़ है !

दूर की हर चीज़ ..
सोना लगती है और
उसकी चाह में ..
ये निरा पागल मानव ..
भागता रहता है ;
सारी उमर और -
जब भोगने का वक़्त ..
आता है तो -
डाइबिटीज और
हार्ट पेशेंट बना कर ..
सबसे पहले उसका
खाना पीना ..
हराम किया जाता है और ..
फिर धीरे से -
रवानगी रजिस्टर पर ..
दस्तखत करवा कर
उसे
RIP कह कर ..
निबटा दिया जाता है !

तू क्यों घबराता है ?
जरा उनकी भी सोच ..
जिनकी ज़िन्दगी में -
हर रात के बाद ..
सुबह नहीं ;
बल्कि रात ही आती है ??

ज़िन्दगी !
अपना दस्तूर निभाती है
और तुझे !
अपनी सीरत निभा कर ..
इस बेअदब ज़िन्दगी को ;
तहज़ीब और मोहब्बत सिखानी है !

"तू अपना काम कर और
वो तो -
अपना काम कर के ..
तुझे निबटा ही रही है !"


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